अब चलो रोबोटों पर ग़ज़ल लिखें
ज़ज्बात चुकी हुई बात कुछ भी आजकल लिखें
नहीं चलती है अब नब्ज़ मेरी
मुर्दा पड़े हैं दिन रात हर पल लिखें
तुमसे जलता हूँ और मुस्कुराता हूँ
नज़र में फरेब है यूं ही थोडी चुहल लिखें
जिंदगी को शराब होना था पानी निकली
सब होश वाले हैं बड़ा संभल संभल लिखें
अब इश्क में नफा और नुकसान है
मोटा है महाजन हाले दिल बदल बदल लिखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें